ऐ हवा
रुख मोड़ ले अपना
इजाजत नहीं तुझे ,
खेलने की , उन काली जुल्फों की घटाओं से ,
बहने की , उस मन की अथाह कंदराओं में ,
रंगने की , उस सतरंगी आभा में ।
ऐ हवा
रुख मोड़ ले अपना
चल , वापस लौट चल
परख नहीं तुझे ,
आँखों के पानी की ,
चेहरे के भावों की ,
उन मीठे अल्फाजों की ,
खुद से किये मौन सवालों की ।
चल , अब लौट भी चल
वापस अपने इदारे में ।
रुख मोड़ ले अपना
इजाजत नहीं तुझे ,
खेलने की , उन काली जुल्फों की घटाओं से ,
बहने की , उस मन की अथाह कंदराओं में ,
रंगने की , उस सतरंगी आभा में ।
ऐ हवा
रुख मोड़ ले अपना
चल , वापस लौट चल
परख नहीं तुझे ,
आँखों के पानी की ,
चेहरे के भावों की ,
उन मीठे अल्फाजों की ,
खुद से किये मौन सवालों की ।
चल , अब लौट भी चल
वापस अपने इदारे में ।