आज फिर से कहीं धुँआ उठा होगा ,
लगता है ,
जरूर दूर किसी बच्चे की चिता जली होगी,
वरना ,
क्यूंकर मेरा आँगन काला होता ।
सुलगी होगी आग दूर कहीं ,
लगता है ,
हुँकार जरूर किसी ढोंगी ने भरी होगी ,
वरना ,
क्यूंकर इक बेटी , भाई , माँ , बाप अपने ही खिलाफ
खड़े होते ।
खड़े होते ।
( यहां ढोंगी धार्मिक , साम्प्रदायिक , राजनीतिक सभी प्रकार के शामिल हैं । )