सिहर जाता हूँ
तेरी कमी की सोच कर ही ,
हो जाता हूँ
सजग , उनके
लिए , जिनके
पास तू नहीं ।
आखिर
हूँ , क्यों नहीं
एक
तू ही तो आती है
आखिरी मैं
मुझ गिरे को उठाने
आंसू पौंछने
जब
कोई नही होता , पास मेरे ।
तेरे माथे की सिलवटैं
देती हैं सम्बल मुझे , कि
हूँ नही अकेला मैं
सोचने वाला , मेरे बारे मैं
सोते ,जागते , काम करते
तू भी तो घुनती है
साथ मेरे ।
हाँ ! हो जाता हूँ
भ्रमित कभी
लेकिन
है फीका , सबका प्यार तेरे आगे ।
माँ !!!!
तू बहुत याद आती है ।
तेरी कमी की सोच कर ही ,
हो जाता हूँ
सजग , उनके
लिए , जिनके
पास तू नहीं ।
आखिर
हूँ , क्यों नहीं
एक
तू ही तो आती है
आखिरी मैं
मुझ गिरे को उठाने
आंसू पौंछने
जब
कोई नही होता , पास मेरे ।
तेरे माथे की सिलवटैं
देती हैं सम्बल मुझे , कि
हूँ नही अकेला मैं
सोचने वाला , मेरे बारे मैं
सोते ,जागते , काम करते
तू भी तो घुनती है
साथ मेरे ।
हाँ ! हो जाता हूँ
भ्रमित कभी
लेकिन
है फीका , सबका प्यार तेरे आगे ।
माँ !!!!
तू बहुत याद आती है ।