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Friday, 25 December 2015

इदारा

  ऐ हवा
  रुख मोड़ ले अपना
  इजाजत नहीं तुझे ,
  खेलने की , उन काली जुल्फों  की घटाओं से ,
  बहने की , उस मन की अथाह कंदराओं में ,
  रंगने की , उस सतरंगी  आभा में ।

  ऐ हवा
  रुख मोड़ ले अपना
  चल , वापस लौट चल
  परख नहीं तुझे ,
  आँखों के पानी की ,
  चेहरे के भावों की ,
  उन मीठे अल्फाजों की ,
  खुद से किये मौन सवालों की ।

  चल , अब लौट भी चल
  वापस अपने इदारे में ।

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