अभिव्यंजना
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Saturday, 19 September 2015
अमिट छाप
हवा के झोके आये बहुत
मगर
कोई टिक न सका ........ तेरी हिलायी डाली पर
न कोई कोयल बैठी
न कभी बौर आया ....
बाहर से हरी सूखी डाली पर ।
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